Sandeep Gupta

रूठा मेरा चाँद-Heart touching love poem in Hindi

रूठा मेरा चाँद आज शाम से चाँद घबराया चांदनी से रूठ कर आया है ! अँधेरी भरी रातों मैं थी कमी चाँद की खुद को छुपाये रखा है बादलो मै कहीं, तरस गयी आँखे चाँद के दीदार की खबर नहीं इसे किसी के इंतज़ार की, खामोस थे लब्ज़ कई सवाल थे आखों में सन्नाटे की …

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पहली बार-कविता

आज सुबह को मैं बाग मे गया, वहाँ कि ताजगी देख कर कुछ देर तो वही रुका, मंन जेसे हरा भरा हुआ, दिल को यही लगने लगा, जब मै तनहा हु तब यही पर रहू! दूर कही नजर पड़ी खिला एक फूल दिखा फूल देख मानो जेसे नया जीवन खिला मै फूल पाने के लिए …

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