वो मेरा संसार बने

जीवन हर्षित करने में, हर्षिता आधार बने।
ऐसी कृपा करो मेरे ईश्वर, वो मेरा संसार बने ।।

जो सद्चरित्र, जो सद्चिन्तन,
जो व्याकुलता है इस हिय की,
जो मृगछैला है, मृगनैनी है,
जो मंदमोहिनी जीवन की,
यही कामना है अब मेरा,
यह जीवन उसका अधिकार बने,
ऐसी कृपा करो मेरे ईश्वर वो मेरा संसार बने ।

जो कविमन की अभिलाषा है,
जो सम्मोहन की परिभाषा है ।
जो राग भैरवी अंतसमन की,
जो मधुरभाषिनी, मधुप्याला है ।
अंतिम इच्छा है यह मेरी की वो ही मेरा उपचार बने,
ऐसी कृपा करो मेरे ईश्वर वो मेरा संसार बने।

जो जीवन का तम हरने को,
उजियाला बन छा जाए,
जो मुस्कान बनी इन होठों की,
यही मुस्कान लिए वो आ जाए।
ये अर्जी हमारी सुन लो मौला,
कि इस गले का वो ही हार बने
ऐसी कृपा करो मेरे ईश्वर की वो मेरा संसार बने।

प्रशान्त श्रीवास्तव
एडवोकेट