रूठा मेरा चाँद-Heart touching love poem in Hindi

रूठा मेरा चाँद
आज शाम से चाँद घबराया चांदनी से रूठ कर आया है !
अँधेरी भरी रातों मैं थी कमी चाँद की खुद को छुपाये रखा है बादलो मै कहीं,
तरस गयी आँखे चाँद के दीदार की खबर नहीं इसे किसी के इंतज़ार की,
खामोस थे लब्ज़ कई सवाल थे आखों में
सन्नाटे की गूंज थी इंतज़ार था बस रातों में
बादलों ने अचानक तेज़ की रफ़्तारे तभी बिज़लियो की घरघराहट हुई !
आसमान ने ली करवट तभी मौसमो ने सुरुवात की,
बदल सा गया है मौसम सभी तभी बादलो ने बूंदो से बरसात की
अपने लिए तो रोज़ जीता है आज जी रहा है दुसरो के लिए !
चाँद के संग चांदनी तो आती है ! पर
आज शाम से चाँद घबराया चांदनी से रूठ कर आया है !
संदीप गुप्ता

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