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मैं याद करुं उस पल को-कविता

मैं याद करुं उस पल को,
जब तुमको पल भर देखा था,

मैं याद करूं उस पल को,
जब तुमको हृदय पटल पर छोड़ा था,
मैं याद करूँ उस पल को,
जब पहली बार लेखनी बोली थी,
मैं याद करु उस पल को,
जब तुमको शब्दो मे पिरोया था।

मैं याद करुं उस पल को,
जब तुमको ग़ज़ल बना कर गाया था,
मैं याद करू उस पल को,
जब मन ही मन मुस्काया था,
मैं याद करुं उस पल को,
जब तुम ऐसी दर्पण बन आयी थी,
मैं याद करुं उस पल को,
जब खुद के चेहरे में तुमको पाया था ।

मैं याद करू उस पल को ,
जब तुम ढोलक की तान बनी थी,
मैं याद करुं उस पल को,
जब तुम मेरा अभिमान बनी थी,
मैं याद करूँ उस पल को,
जब तुमको आंखों से सुन पाया था,
मैं याद करुं उस पल को,
जब तुम बिना कहे कुछ बोली थी ।

मैं याद करु उस हर पल को
बस याद करु उस पल पल को
बस याद करू, बस याद करू
बस याद करूँ उस हर पल को।

प्रशान्त श्रीवास्तव

एडवोकेट