बॉस की डांट सुनकर ,
थोड़ी परेशान थी, थोड़ी घबराई थी,
फिर सोचा कुछ तो सीख कर आई थी,

आंसुओ को बहने से रोका,
खुद को गिरने से रोका,
गुस्से को काबू में रखकर ,
बड़ी मुश्किल से संभल पाई थी,
बॉस की डांट सुनकर ….थोड़ी परेशान थी….फिर सोचा कुछ……..

हर वक्त गलत लगते थे हम,
हर काम गलत करते थे हम,
फिर भी ना जाने हर काम,
मुझसे ही कही जाती थी ,
बॉस की डांट सुनकर ……थोड़ी परेशान थी…..फिर सोचा कुछ……..

वो ना आते तो अच्छा होता,
थोड़ी मस्ती होती थोड़ा काम होता,
जब दिन गया गुजर तो समझी,
आज कुछ नया नहीं सीख पाई थी,
बॉस की डांट सुनकर……..थोड़ी परेशान थी……फिर सोचा कुछ……..

By-Harshita Srivastava