प्रेम की पाती- कविता

अजब सी प्रेम की पाती,
तुम्हारे नाम लिखता हूं,
तुम्हे मैं कृष्ण की गीता,
तुम्हे कुरान लिखता हूं,
ग़ज़ब है प्रेम का बंधन,
ग़ज़ब ये नेह का बंधन,
तुम्ही को कामना हिय की,
तुम्ही को काम लिखता हूं ।
अजब सी ……..
ये सागर सी तेरी आंखें,
ये झूले सी तेरी बाहें,
कमल सा होंठ ये तेरा,
तेरी कमसिन अदाएं,
सुनो हे प्रेम की देवी
तुम्हे हर धाम लिखता हूं,
अजब सी…
तुम्ही हो गीत का कारण,
तुम्ही हो कण्ठ का चारण
तुम्ही हो शब्द भी मेरे,
तुम्ही श्लोक वेदों के,
तुम्हे मैं रूप की रानी,
अवध की शाम लिखता हूं।
अजब सी . …..

प्रशान्त श्रीवास्तव

Prashant Srivastava
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