प्यार बेशुमार करते हैं पापा। (Father’s Day special Poem)

उनके गुस्से में फ़िक्र छुपी होती हैं,
उनके आंखों में प्यार छुपा होता हैं,
ना ज्यादा जताते हैं , ना ज्यादा बताते हैं,
लेकिन प्यार बेशुमार करते हैं पापा।

जब शर्ट गिफ्ट दिया, तो बोले इसकी ज़रूरत नहीं ,
बेकार में पैसे की बर्बादी हैं,
जब जैकेट गिफ्ट दिया, तो कहा
महंगा बहुत हैं मैं इससे सस्ते में लाता,
लेकिन ज्यादा वही शर्ट और जैकेट पहन के जाते हैं पापा
ना ज्यादा जताते हैं , ना ज्यादा बताते हैं,
लेकिन प्यार बेशुमार करते हैं पापा।

थक कर भी थकते नहीं, दर्द में भी रुकते नहीं,
हर दिन एक नई कोसिस, हर पल की जिम्मेदारी
ना जाने इतनी हिम्मत कहा से लाते हैं पापा
ना ज्यादा जताते हैं , ना ज्यादा बताते हैं,
लेकिन प्यार बेशुमार करते हैं पापा। ।

उनकी जिम्म्मेदारिया तो शायद कभी समझ ही नहीं पाती,
अगर मैं जॉब ना करती,
कितना मेहनत का काम होता हैं पैसे कमाना,
ना जाने कितनी मुश्किल से पैसे कमाते हैं पापा
ना ज्यादा जताते हैं , ना ज्यादा बताते हैं,
लेकिन प्यार बेशुमार करते हैं पापा।

By-Harshita Srivastava

Default image
Harshita Srivastava
I am interested to know and share about health and beauty tips, I have read and keep reading a lot of articles through newspaper, website and other social media platforms, and when we get a good content then I share with you through this website, mostly I share the content experienced by myself, family and my friends, apart from this I also love to write poetry. Whenever I get time I make Poem and I shared that too with you and will continue to do so, thank you so much for your love and support.
Articles: 417

Newsletter Updates

Enter your email address below to subscribe to our newsletter

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.