देवी बनाकर पूजने से ज्यादा जरूरी है सम्मान देना।(Save girl)

नवरात्र के आखिरी दिनों में कन्या पूजन का विशेष महत्व है, इस दौरान लगभग सभी लोग लड़कियों को देवी मानकर अपने घर भोजन के  लिए बुलाते हैं और उनका पैर धुलना, रोली का  टीका लगाना  और चुनर उधाते हैं, और उन्हें भोजन कराते हैं । और उन्हें उपहार भी देते हैं । और वही दूसरी तरफ लड़कियों को जन्म लेने से पूर्व ही कोख में मार देते हैं, उन्हें पढ़ने लिखने का मौका नहीं देते, आप सभी जानते हैं  लड़कियां भी लडको से कहीं कम नहीं हैं वो भी अपने बल बूते पर आसमान को छू रही हैं,तो फिर आज भी समाज उन्हें लडको के बराबर क्यों नहीं समझ रहा। इसे समाज को दोहरा रवैया नहीं तो क्या कहा जाए ।

बेअसर हुए प्रयास-(Ineffective Effort)

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और भी कितने अभियान चलाए गए , फिल्म भी बनाई गई लेकिन बेटियों की घटती संख्या बताती हैं कि लोगो की सोच आज भी नहीं बदली हैं सारे प्रयास बेअसर दिखाई दे रहे हैं, सरकार ने लड़कियों की अनुपात को घटते हुए देख कर 33 फीसदी आरक्षण भी दे रही है,. और अपनी तरफ से कोसिस भी कर रही हैं, लेकिन जब तक समाज में रहने वाले व्यक्ति इसको गंभीरता से नहीं लेंगे लिंगा अनुपात यु ही घटता रहेगा। हमारा समाज चाहे कितना भी शिक्षित क्यों न हो, कुछ अपवादों को छोड़कर आज भी हमारा समाज नहीं चाहता की उनके घर बेटी पैदा हो।

लड़कियों के बिना दुनिया(World without girls)-

आप एक बार सोच कर देखिये की लड़कियों के बिना दुनिया कैसी होगी,की लड़कियों के बिना दुनिया कैसी होगी, कहा से लाएंगे बहु कैसे आगे बढ़ाएंगे वंश को, इन्हीं सब को ध्यान में रखते हुए 2003 एक मूवी बनाई गयी थी “मातृभूमि -अ नेशन विथाउट वीमेन” इस मूवी में महिला शिशुहत्या की प्रथा के कारण एक गांव बिना महिलाओं का हो दिया जाता है, वह पर एक भी महिला नहीं होती। यह मूवी समाज को चेतावनी देने के लिए थी, अगर इसी प्रकार महिलाओ की संख्या कम होती, रही टी स्तिथि बद से बत्तर हो जाएगी। और फिर हम चाह कर भी इस कमी को जल्द से जल्द पूरी नहीं कर पाएंगे, हमारे समाज के सभी लोगो को इस बारे में सोचने की ज़रुरत हैं, और अगर आपने ये मूवी नहीं देखि हैं तो ज़रूर देखिये, सायद यह आपकी सोच बदलने ने कामयाब हो जाए।

आखिर कब बदलेंगे हम(When will we change)-

दुनिया इतनी आगे निकल गयी है महिलाएं हर क्षेत्र में बुलंदियों को छू रही हैं लेकिन इसी समाज में कुछ लोग ऐसे भी है जो बेटी पैदा नहीं करना चाहते , बेटी को पढ़ाना लिखना नहीं चाहते, इनकी इसी सोच की वजह से महिलाओ की जनसख्या में कमी आ रही हैं, सरकार जब इतनी सुबिधाये दे रही हैं तो आप नहीं रक कदम आगे बढ़ाइए और अपनी सोच बदलिए , एक कहावत कही जाती हैं अगर बेटा पढता हैं तो सिर्फ एक घर शिक्षित होता हैं जब की एक बेटी पढ़ती हैं तो दो घर शिक्षित हो जाते हैं , बेटी पढ़ाओ- बेटी बचाओ

असुरछित समाज का डर(Fear of the unsafe society)-

यह एक बड़ी वजह की लोग नहीं चाहते कि उनके घर बेटी पैदा हो, बेटी पैदा करने से जायदा ज़रूरी हैं उन्हें एक सुरछित समाज में रखना, लेकिन “दंगल ” मूवी देखकर तो आप समझ ही गए होंगे की बेटियाँ किसी भी प्रकार से बेटो से कम नहीं हैं, आप उन्हें इतना मजबूत बनाइये की वो अपनी लड़ाई खुद लड़ सके।
“यह बहुत स्पष्ट है कि एक लड़की हमेशा समाज के लिए आशीर्वाद बनती है और इस दुनिया में जीवन की निरंतरता के लिए कारण है। हम विभिन्न त्योहारों में कई महिला देवी की पूजा करते हैं, वास्तव में, लड़कियां समाज के खंभे की तरह हैं। एक छोटी सी लड़की एक अच्छी बेटी हो सकती है( “Please save girl child”)

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