तुझसे तेरी एक हाँ मांगता हूं-कविता-Love Poem in Hindi

तुम्हे मैं सख्शियत-ए-खास बनाकर दिखाऊंगा दुनिया को,
मैं तो खुदा से एक जहाँ मांगता हूं,

दुनिया देखेगी मुझसे किये गए मेरे वायदों को,
तेरे लिए ज़मी से उसका आसमां मांगता हूं ।

तू शरीक-ए-हयात बनकर शामिल हो इस जीवन में,
इससे ज्यादा मैं तुमसे और क्या मांगता हु ।

तेरी आँखों की पुतलियों में जो रौनक-ए-खास के किस्से है,
मैं उन किस्सो में एक नाम के सिवा कुछ कहाँ मांगता हूं।

हम तो शागिर्द है तुम्हारे तेवर तुम्हारे, फलसफों के,
मैं खुद के लिए तेरा फ़लसफ़ा मांगता हूं ।

मैं तो अपनी हर रवायतें, हर इबादतें कर दिया हु नाम तेरे,
बस तुझसे तेरी एक हाँ मांगता हूं ।

प्रशान्त श्रीवास्तव

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Prashant Srivastava
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