ओस की बूँद सा इश्क,
एक पत्ते पर रुका हुआ ,

थोड़ी हवा चली तो फिसल जायेगा,
थोड़ी धुप हुई तो सुख जायेगा,
किसी ने छुआ तो बिखर जायेगा,
फिर भी ना डर ना फ़िक्र,
बस एक जुनून सा इश्क़………..ओस की बूँद सा इश्क।

हज़ारों बूंदों की हुई बारिश
बस एक बूंद रह गया था,
अकेला था फिर भी,
गुरुर रह गया था,
पत्ते के गोद में सुकून सा इश्क….ओस की बूँद सा इश्क।

रात का समय,
ठंडी सी हवा,
चाँद की चांदनी से चमचमाता,
खूबसूरत नूर सा इश्क़ ……..ओस की बूँद सा इश्क।

By-Harshita Srivastava